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विज्ञान और मान्यताएं एक ही पक्षी दो पंखों की तरह है

इस रविवार की सुबह हमारे परिवार ने 'पोंगल' त्योहार मनाया, हमने पूजा की और सुबह 8:00 बजे तक हमारा ब्रेकफास्ट हो गया, जो बहुत दुर्लभ है। चूँकि पोंगल बहुत स्वादिष्ट बना था तो घर में काम करने वाले लोगों के लिए अलग निकालने के बाद मेरी बेटी ने बर्तन में हाथ डाला और उसे वाशबेसिन में डालने के पहले खुरच-खुरचकर हर कण खाने लगी। तत्काल मेरी पत्नी ने ध्यान दिलाया, "यदि तुमने बर्तन में से हर कण निकालकर उसे पूरा खा लिया तो हमारे परिवार को निर्धनता का सामना करना पड़ेगा"।

science and beliefs

तत्काल मेरी बेटी ने विरोध किया "यदि आपके द्वारा पकाया गया अन्न बर्बाद किया गया तो गरीबी आएगी, क्या आपको पता है कि अन्न को हमारे डाइनिंग टेबल तक पहुंचाने के लिए किसान कितनी मेहनत करते हैं, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री कितनी उर्जा लगाती है और फिर थोक विक्रेता से लेकर रिटेल तक की संख्या श्रृंखला........" दलीलें जारी रही।


हमारे घर में विज्ञान को बेदखल करती मान्यताएं और मान्यताओं के खिलाफ विज्ञान की दलीलें सामान्य बात है, जब तक कि मैं ऐसा कोई बीच का रास्ता खोज लेता की एक ही छत के नीचे दोनों शांतिपूर्वक साथ रह सके। मैंने वह कहा, जो मेरी मां ने बरसों पहले कहा था कि क्यों कोई बर्तन पूरी तरह खाली नहीं किया जाना चाहिए कुछ अन्न उसमें छोड़ देना चाहिए। Read Also: हाइफा लड़ाई का स्मृतिस्थल है तीनमूर्ति चौक


"उन दिनों बर्तन नदी किनारे गीली मिट्टी से साफ किए जाते थे और यदि आपने बर्तन में कुछ अन्य छोड़ा है तो मछली या किसी अन्य जीव को कुछ खाने को मिल जाता। यह ईश्वर की अन्य रचनाओं की देखभाल करने का अप्रत्यक्ष तरीका है और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया भी। यह समाज में हर चीज बांटकर साझा करके उपभोग करने का सबक भी था जिसके बीज उस वक्त की नई पीढ़ी में बोए जाते थे"।


"अब केमिकल पाउडर ड्रेनेज सिस्टम आधुनिक कॉलोनी के साथ के साथ आने के साथ बर्तन में कुछ अन्य छोड़ने से हमारे पूर्वजों के मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती। लेकिन मैंने अपनी बेटी से कहा क्योंकि दुनिया ग्रीन लिविंग यानी पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की ओर लौट रही है तो उन धारणाओं परंपराओं को समझना जरूरी है कि क्यों हमारे पूर्वज इस तरह रहते थे और उन्होंने हमारे संगठित जीवन में कुछ 'विधियां' को शामिल की हालांकि उनका पालन अब नहीं होता। यह तुम्हारी पीढ़ी के लिए भविष्य करने में पढ़ने में मददगार होगा।" इसके बाद मेरे घर में शांति छा गई। Read Also: प्राचीन धरोहरों का संरक्षण एक प्रश्‍न

इससे तो इनकार नहीं किया जा सकता कि यह एक ऐसा युग है जिसमें पुरानी सांस्कृतिक पद्धतियों को अपनाने वाले और हर ऐसी धारणा के लिए वैज्ञानिक सबूत मांगने वाली आधुनिक युवा पीढ़ी इन मामलों पर कभी सहमत नहीं होते। लेकिन जब दो भिन्न पीढ़िया मेरे परिवार की तरह शिक्षा के जरिए या विवाह के जरिए एक ही छत के नीचे रहने आती है तो दोनों पीढ़ियों में प्रभुत्व के लिए स्पर्धा होती है। और इस तरह उस घर से शांति चली जाती है। Read Also: मानसिक विकार को जन्म दे रहा सेल्फी का क्रेज


कई पीढ़ियों तक धर्म के माध्यम से ही मान्यता श्वेता श्रद्धा विश्वास से ही सारे उत्तर मिलते थे लेकिन पिछली सदी से विज्ञान ने यह काम करना शुरु कर दिया है।

इससे पहले कि आप बहु से कहे की, "क्या तुम्हारे पालकों ने तुम्हें घुंघट का महत्व नहीं बताया, जो सम्मान देने का प्रतीक है" या अपनी बेटी को किसी की युगो पुरानी पद्धति बताने से पहले अपने तथ्य, इतिहास और कथाएं जुटा ले ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दोनों पीढ़ियों में शांति बनी रहे। इसका आशय यह है कि मान्यताओं का भी कोई तथ्यात्मक आधार होता है और उनके संबंध में बात करते समय यह आधार मालूम हो तो चीजे आसान हो जाती है।


फंडा यह है कि "कई मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक कारण है लेकिन कुछ उस समय विशेष के लिए प्रासंगिक थे उनकी जड़ों को समझना आवश्यक है क्योंकि विज्ञान व मान्यताएं एक ही पक्षी के दो भिन्न पंख है"। 

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